पाठ • हिंदी (संक्षिप्त)
बाल समय रवि भक्षि लियो तब, तीनहुँ लोक भयो अँधियारो। ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो॥
बालि की त्रास कपीस बसै गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो। चौंकि महामुनि शाप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो॥
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प्रत्येक श्लोक के अंत में “को नहीं जानत है जग में कपि, संकट मोचन नाम तिहारो” — करुणा की पुनरावृत्ति।